आश्रमों में जीवन को दीप जैसा बनाया जाता है जो खुद जलकर सबको प्रकाशित करता है – डॉ. मोहन भागवत जी

वृन्दावन (मथुरा)।

जीवन दीप आश्रम वृन्दावन के लोकार्पण समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि आश्रम केवल पेट भरने का नहीं, बल्कि वास्तविक ज्ञान का केन्द्र होते हैं। इनसे व्यक्ति को जीवन में इतना साहस मिलता है कि वह जीवन के थपेड़ों से लड़ने में सक्षम बनता है। आश्रम देश की एक पाठशाला है। यहां जीवन विद्या सिखायी जाती है। आश्रम में आने वाला, पाठ पढ़ने वाला, न सिर्फ अपने भौतिक शरीर को ठीक रखता है, अपितु भौतिक जीवन से बाहर भी वह अग्रेषित होता है।

सरसंघचालक जी महामंडलेश्वर स्वामी यतीन्द्रानन्द गिरी जी महाराज द्वारा वृन्दावन में नवनिर्मित जीवनदीप आश्रम के लोकार्पण समारोह में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चौथा पुरुषार्थ धर्म है, इसकी शिक्षा आश्रमों में मिलती है। आश्रमों में जीवन को दीप जैसा बनाया जाता है जो खुद जलकर सबको प्रकाशित करता है। जीवनदीप अपेक्षा नहीं करते। प्रतिकूलता सामने आने पर काम छोड़ने वाले नहीं होते, हर परिस्थिति में कार्य करते रहते हैं। ऐसे चरित्र निर्माण का काम आश्रमों में होता है, आज भी होता है।

उन्होंने कहा कि धर्म और  चिकित्सा विज्ञान तथा व्यवहार कहता है कि तीन संतान अवश्य होनी चाहिये। जनसंख्या शास्त्री भी कहते हैं कि तीन बच्चे के नीचे मत आओ, आज दुनिया के देश प्रयास करके अपनी जन्म दर को बढ़ा रहे हैं। पचास साल बाद भी यह जनसंख्या उपयोगी बने, ऐसा सबको समझाकर जनसंख्या नीति लानी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश में घुसपैठ को रोकने के प्रयास चल रहे हैं, घुसपैठियों को रोजगार देने से बचना चाहिए।

समारोह का शुभारंभ हनुमान चालीसा पाठ के साथ दिल्ली स्कूल के बच्चों की प्रस्तुति के साथ हुआ।

मैं बचपन से स्वयंसेवक हूँ – अवधेशानन्द जी

समारोह में जूनागढ़ अखाड़ा के पीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेस्वर अवधेशानन्द गिरी जी ने कहा कि हमने 12 लाख नागाओं को दीक्षा दी है। हमारे मस्तक पर त्रिपुंड है अर्थात यह हमारे शैव होने का प्रतीक है। हम अंदर से शाक्त हैं। व्यवहार से हम वैष्णव हैं अर्थात हम सब साधु संत एक हैं। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति ने मुझसे पूछा कि सरसंघचालक और स्वयंसेवक में क्या अंतर है, हमने कहा दोनों में समानता यह है कि दोनों ही स्वयंसेवक हैं। उन्होंने कहा कि मैं भी बचपन से स्वयंसेवक हूँ और यतीन्द्रानन्द जी भी बचपन से स्वयंसेवक हैं।

समारोह में दीदी माँ साध्वी ऋतम्भरा जी ने कहा कि शत संकल्प के प्रति पूर्ण निष्ठा ही संसार के किसी भी कार्य की पूर्ति में सहायक है। हमारे अंदर अहंकार न हो। जीवन दीप आश्रम के लोकार्पण पर हार्दिक शुभकामनाएं प्रदान कीं।

समारोह का संचालन स्वामी पद्मानन्द गिरी जी महाराज ने किया। समारोह का समापन वंदेमातरम के साथ हुआ।

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