हर स्वर ने किया वंदन, अभिनदंन अभिनदंन
विश्व संवाद केंद्र बृज प्रांत के फिल्म आयाम की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में 70 प्रतिभागियों ने गया गीत
खेरेश्वरधाम के निकट रेडिएंट स्टार्स इंग्लिश स्कूल में आयोजित हुआ कार्यक्रम
हरिगढ़ (अलीगढ़): स्वरों का स्पंदन कार्यक्रम में हर स्वर ने राष्ट्र वंदन किया। शब्द स्वर बने तो गीत साक्षात मां सरस्वती का आशीर्वाद। मानों धरा पर स्वयं मां शारदे प्रतिभागियों का अभिनंदन करने पहुंच गईं हों। राष्ट्र के प्रति समर्पित गीतों की इस माला ने एक इतिहास रच दिया। ऐसा कार्यक्रम पहली बार हुआ जिसमें सिर्फ आरएसएस के गीतों पर ही स्वर गूंजे। सोशल मीडिया के माध्यम से आयोजन की गूंज पूरे देशभर में गई।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से शताब्दी वर्ष पर स्वरों का स्पंदन कार्यक्रम आयोजित किया गया। खेरेश्वरधाम मंदिर के निकट रेडिएंट स्टार्स इंग्लिश स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में दोपहर 12 बजे कमिश्नर संगीता सिंह, पूर्णानंदपुरी महाराज, नेह नीड़ के संस्थापक कन्हैया लाल, प्रांत प्रचार प्रमुख कीर्ति कुमार, महक सिंघल ने दीप प्रज्वलन कर किया।
‘भारत मां का मान बढ़ाने बढ़ते मां के मस्ताने’ गीत ने पूरे माहौल को देशभक्ति से ओतप्रोत कर दिया। फिर देशभक्ति गीतों का सिलसिला शुरू हुआ तो शाम तक हर कोई मंत्रमुग्ध होकर सुनता रहा। गीतों में सुर सधे तो सुर गंगा की धार बह उठी। प्रथम, द्वितीय, तृतीय वर्ग के 70 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। मुख्य वक्ता आरएसएस के पश्चिमी यूपी के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम सिंह ने कहा कि इस हरिगढ़ की भूमि से स्वामी हरिदास जी के नाम पर एक नया उद्घोष, उस ध्वनि का गुंजायमान इस संपूर्ण देश, विश्व के अन्दर आज हो चुका है। किसी कवि ने कहा है कि शब्द जोड़ते हैं, शब्द तोड़ते भी हैं, शब्द बिगाड़ते हैं और शब्द संवारते हैं। तो कौन से शब्दों की बात कर रहे हैं हम? संगीत के शब्दो की बात कर रहे हैं। इस भारत के काव्य के अन्दर दो विधाएं ऐसी आयीं – संगीत और नाटक। ये दोनों विधाएं व्यक्ति के तन और मन दोनों का समन्वय करके, दोनो को एक निर्माण की दिशा में अर्थात उन शब्दों को साथ लेकर ये गीत और नाटक जो मंच पर किया जाता है, वह सीधे-सीधे हृदय को स्पर्श करता है और हृदय और आंखें किसी दृश्य को देखती हैं तो वह दृश्य लंबे समय तक उस व्यक्ति को अपनी ओर से हटने नहीं देता है। शब्द भी वही काम करते हैं, संगीत भी वही काम करता है। यह संगीत व्यक्ति को व्यक्ति से नहीं, व्यक्ति को समाज से जोड़ता है। व्यक्ति को देश से जोड़ता है। व्यक्ति को उसकी परम्परा और संस्कृति से जोड़ता है और जब इन सबसे जोड़ने का काम करता है तो एक नयी सृष्टि का निर्माण होता है।

उन्होने बताया कि वंदे मातरम् गीत की चर्चा हुई, बहते सुरों का नाद वंदे मातरम्। जरा उस वंदे मातरम को याद करियें। वह केवल पंक्तियां थीं, शब्द थें, लेकिन वह शब्द व्यक्ति के, जनमानस के हृदय पर ऐसा स्पर्श किये, ऐसे अंकित हो गये, कि उन शब्दों को फांसी की फन्दा सामने देखने के बाद भी व्यक्ति उसी आत्मविश्वास के साथ, जिस आत्मविश्वास के साथ उस संघर्ष में-उस लड़ाई में कुछ पाने के लिए बढ़ा था, उस आत्मविश्वास को डिगाने नहीं देता। यह महत्ता केवल और केवल संगीत की है।
उन्होंने आगे कहा, आज जितनी भी प्रस्तुतियां यहां हुई, जितने भी गीतो का गायन आज इस कार्यक्रम में हुआ, उन सब गीतों में क्या था। मेरा समाज था, धर्म था, देश था, परम्पराएं थीं और वह शब्द मुझकों वहां देखने के लिए, जोड़ने के लिए मजबूर कर रहे थे। कई सारे प्रतिभागी उन सारे शब्दों के साथ अपना आपा खोये हुए थे, थिरक रहे थे, स्पंदन इसी का नाम है और वह कब होता है? जब वह शब्द हृदय से निकलते हैं और हृदय से कब निकलेंगे, जब हृदय उनको स्वीकार करता है, इसलिए स्वरों का स्पंदन एक सामान्य कार्यक्रम नहीं था। प्रदर्शनी की प्रशंसा करते हुए पदम सिंह ने कहा कि भारतीय संगीत विद्या के वाद्ययंत्रों का एवं उनकी ध्वनि की सुनाने की व्यवस्था जो कि गई है यह जब किसी आयोजन को प्राण प्रण से किया जाता है तब संभव होता है। वाद्य यंत्रों की डाक टिकट को प्रदर्शनी में शामिल करने से बच्चों को विशेष जानकारी मिली है।
कमिश्नर संगीता सिंह ने मुक्तक ‘संगीत है शक्ति ईश्वर की, हर स्वर में बसे हैं राम, रागी जो सुनाए रागिनी रोगी को मिले आराम’ सुनाकर उन्होंने गीतों के महत्व को बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस कार्यक्रम में प्रत्यक्ष उदाहरण भी देखने को मिला। उन्हें आश्चर्य हुआ कि संघ के लगभग 500 गीतों का संग्रह है जो देशभक्ति की भावना पैदा करता है।
नेह नीड़ के संस्थापक कन्हैया लाल ने कहा कि उनके जीवन में यह पहली गीतों की प्रतियोगिता है, जो उनके स्वप्न से भी परे है। गीत बचपन से उन्होंने भी गाया है मगर इस प्रकार के ऐतिहासिक कार्यक्रम की कल्पना उन्होंने भी पहले कभी नहीं की थी।

नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि इस तरह की देशभक्ति के कार्यक्रम लगातार कालेज व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर होते रहने चाहिए। सुनील कौशल महाराज ने कहा कि स्वामी हरिदास जी की विधा को बढ़ाना ही संगीत की सबसे बड़ी तपस्या है। वृन्दावन से पधारे गोविंद दास महाराज ने कहा कि जब स्वामी हरिदास गीत गाते थे तो यमुना का जलस्तर बढ़ जाया करता था। उनके स्वर से प्रकृति भी झूम उठती थी। प्रतियोगिता में मैनपुरी, हाथरस, एटा, कासगंज, आगरा, मथुरा और वृन्दावन से प्रतिभागियों ने भाग लिया।
ब्रज प्रांत के प्रचार प्रमुख श्री कीर्ति कुमार ने कहा कि ये गीत केवल शब्द नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का संकल्प हैं। लोग फिल्मी गीतों के गुनगुनाने के स्थान पर देशभक्ति गीतो की तरफ थोड़ा सा बढ़े, ऐसा यह कार्यक्रम स्वरों का स्पंदन आप सभी के मध्य है। यहां पर एक नाम-एक संगठन उसका नाम जरूरी है यहां पर ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ उसके सौ वर्ष की यात्रा इस समय पूर्ण हो रही है और पूर्ण होने के पश्चात् ध्यान में आया कि सौ वर्ष में किस बात को लेकर यह संघ चला था, तो एक ही भाव सर्वत्र भारतमाता की जय होनी चाहिए, और जय कैसे होगी? आप जैसे नये युवा अच्छे विचार जन-जन तक पहुंचायेंगे, तो स्वाभाविक है, ‘विश्व में गूंजे हमारी भारती, जन-जन उतारें आरती’ यह पंक्ति सर्वविद्यमान हो जायेगी। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से निवेदन भी किया कि आज हमें यहीं पर रूकना नहीं है, संघ गीतों को आगे भी विभिन्न मंचों से गुनगुनाएं, प्रस्तुति दें, जिससे ‘भारतमाता की जय’ सर्वत्र गुंजायमान हो।
कार्यक्रम संयोजक मनोज शर्मा ने अतिथियों एवं निर्णायक मंडल का आभार जताया। उन्होंने कहा कि उनके संगीत की तपस्या का यह नया आयाम है। सीडीओ योगेन्द्र कुमार ने कार्यक्रम की सराहना की। विष्णु भैया, नगर पालिका परिषद अध्यक्ष श्वेता चौधरी दिवाकर ने कहा कि बच्चों को पुरस्कृत किया।
इस अवसर पर विभाग सह संचालक ललित कुमार, विभाग प्रचारक गोविंद, वरिष्ठ प्रचारक कालीचरण, महानगर संघचालक अजय सराफ, विभाग प्रचार प्रमुख भूपेंद्र शर्मा, सुनील चौहान, पंकज कुमार, महानगर प्रचारक रामजी, अवनीश बजरंगी, रिषभ सिंह आदि मौजूद थे।
कार्यक्रम में इनकी रही बड़ी भूमिका
कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण पदाधिकारियों की बड़ी भूमिका रही। जिससे कार्यक्रम सफल रहा। इसमें सुधीर शर्मा, डाक्टर अंशु सक्सेना, आलोक याज्ञनिक, शैलेन्द्र विक्रम, निधीशकांत भट्ट, अधिवक्ता हृदेश शर्मा, डाक्टर अभय पचौरी, अजय नेवी आदि थे। वहीं, सैनिक के वेश में एचएफ के स्वयंसेवकों ने अतिथियों का स्वागत किया।
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देश के विभिन्न स्थानों से आए निर्णायक
गीतों के इस अभिनव प्रयोग में देश के विभिन्न स्थानों से निर्णायकों को आमंत्रित किया गया था। मुख्य निर्णायक शिल्पी अनुज, क्षेत्र संयोजक पर्यावरण रणवीर सिंह, क्षेत्र कार्यकारणी सदस्य सुशील कुमार, रूप किशोर शर्मा, कन्हैया लाल, राजाराम मित्र, चंद्रभूषण शर्मा, प्रख्यात गायक पुंडीरकाक्ष देव पाठक, लेखक व संगीतकार मधुकर चतुर्वेदी, गीतकार चन्द्रशेखर, गीत विशेषज्ञ विभाग प्रचारक कुलदीप, सचिन शर्मा, भक्ति साधना, चंद्रहास कुमार, अश्वनी ठाकुर, जय प्रकाश सारस्वत, शैलेन्द्र दीप शालू, राजेंद्र मल्होत्रा ने बच्चों की प्रतिभा की पहचान की।

प्रतियोगिता में इन्होंने मारी बाजी
वर्ग अ में
प्रथम तोयष राघव, द्वितीय स्वर्णिम कुलश्रेष्ठ, तृतीय मेघांश रहे।
वर्ग ब में प्रथम अध्विक शर्मा, द्वितीय खुशी शर्मा, तृतीय अंतरा पचौरी और उम्मे कुलसुम रहे।
स वर्ग में प्रथम दामिनी चौधरी, द्वितीय अभिषेक चौहान और तृतीय योग्यता सारस्वत रहे।
प्रदर्शनी ने सभी का दिल जीत लिया
स्वरों का स्पंदन कार्यक्रम में शैलेंद्र विक्रम के संयोजन में लगी प्रदर्शनी ने सभी का दिल जीत लिया। प्रदर्शनी में भारतीय वाद्ययंत्रों की जानकारी दी गई। कब कब इन वाद्य यंत्रों पर डाक टिकट जारी हुए हैं, उनके बारे में भी बताया गया। वाद्य यंत्रों के निकट पहुंचने पर उन्हें वाद्य यंत्रों की धुन बजती थी। आकर्षक रंगोली की सभी ने तारीफ की। इसमें विभिन्न वाद्ययंत्र बनाए गए थे। कई स्थानों पर बने सेल्फी प्वाइंट पर बड़ी संख्या में लोगों ने सेल्फी की।

